यह पहले ही तय कर लेना बेहतर है
कार्बन अधिकार किसके पास हैं
यह सवाल बाद में पूछा जाए तो झगड़ा बनता है। इसलिए हम इसे शुरू में ही लिख देते हैं।
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डिफ़ॉल्ट
पट्टे की पूरी अवधि के लिए कार्बन अधिकार BAASLAB के पास रहते हैं, जब तक लिखित में कुछ और तय न हो। वजह सीधी है। पूँजी हम लगाते हैं, जोखिम हम उठाते हैं, और तीस साल तक मापन हम चलाते हैं।
तीन और तरीक़े
- हिस्सेदारी। हटाव से हुई आमदनी तय अनुपात में बाँटी जाती है।
- ज़मीन मालिक के पास अधिकार। तब किराया कम होता है, क्योंकि जोखिम का बँटवारा बदल जाता है।
- दोहरा दावा नहीं। अगर ज़मीन मालिक ख़ुद किसी योजना में यह कार्बन दिखाना चाहता है, तो हम उसे नहीं बेचेंगे। एक ही टन दो जगह गिना जाना पूरे बाज़ार का भरोसा तोड़ता है।
हम इसे इतनी जल्दी क्यों उठाते हैं
कार्बन की क़ीमत आज कम है और दस साल बाद ज़्यादा हो सकती है। जो पक्ष यह सोचकर चुप रहता है कि बाद में देख लेंगे, वही बाद में सबसे नाराज़ होता है। इसलिए हम पहली बैठक में ही यह मेज़ पर रख देते हैं।
इस पर बात कर लीजिए
चारों ढाँचों में से कौन सा आपके लिए ठीक है, यह पहले तय कर लेना बाद में बदलने से कहीं सस्ता पड़ता है।